विधवा
अर्ज़ किया है,
लिखी कहानियां कहानीकार ने,
बताया बस आज का
छुपाया कल का
क्या किसी का कसूर।
निभा रहे क़िरदार
एक दूसरे के नशे मैं चूर
पता नहीं विधाता
कब कर देने दूर ।
अकेले बैठे हाथ बांधकर
सुन लो प्रीतम पुकार
एक खत्म हो गया
किरपा करो
दूसरा शुरू करो किरदार
मत करो ज़िंदगी मजबूर
छुपाया हमसे कल… read more